About Nagram

नगराम,हिंदुस्तान के उत्तर प्रदेश के लखनऊ ज़िले का एक क़स्बा है। यह क़स्बा रायबरेली रोड़ और सुलतानपुर रोड़ के बीच में बसा है। नगराम लखनऊ शहर से 37 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है।

नगराम अवध में अपनी अज़ादारी के लिये मशहूर है। नगराम अवध का एक ऐसा क़स्बा है कि जहाँ न सिर्फ़ शिया बल्कि मुस्लमानों का हर फ़ि्का़ और हिन्दू क़ौम के भाई भी अज़दारी ए इमाम हुसैन(अस) बढ़-चढ़ कर मनाते हैं।

हम आपसे गुज़ारिश करते हैं कि इस कारे खै़र में हमारा साथ दें और नगराम की मज़ीद ख़बरों के लिये इस वेबसाईट से जुड़े रहें।

लब्बैक या हुसैन لبيك يا حسين

हम मोहर्रम क्यों मनाते हैं?

मुसलमानों के आखि़री नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा(स.अ.) की इकलौती बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) के बेटे हज़रत इमाम हुसैन(अ.स.) थे,जिन्होनें करबला के मैदान में यज़ीद जैसै अत्याचारी इंसान के सामने अपना सिर नहीं झुकाया,बल्कि अपना सिर कटा कर इस्लाम और इन्सानियत को नया जीवन दिया और पूरी दुनियॉ को आज़ादी व अमन का संदेश यह कह कर दिया कि ज़िल्लत के जीवन से इज़्ज़त की मौत अच्छी है। करबला की इस दुखद घटना और इमाम हुसैन(अ.स) के इसी संदेश को हिन्दुस्तान की स्वतंत्रता के लीड़र महात्मा गांधी ने अपनी मुहिम का हिस्सा बनाया और करबला के 72 शहीदों के नाम पर अंग्रेज़ों से लड़ाई के लिये अपने साथ 72 साथियों का काफ़िला ले कर निकल पड़े और सफ़लता पाई। यह मोहर्रम हम उसी दुखद घटना की याद में मनाते है जो इमाम हुसैन(अ.स) के साथ हुई थी।

मैनें हुसैन(अ.स) से सीखा की जब अत्याचार हो रहा हो तो जीत कैसै प्राप्त की जाए।
महात्मा गांधी।

Contact The Community

Feel free to email us to provide some feedback on our website, give us suggestions for new campaigns and artilces, or to just say hello!

You could fill this form to share your valuable comments and suggestions, alternatively you could use email.

[email protected]